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कुंभ जर्नल

इतिहास और पवित्र भूगोल

चार कुंभ स्थलों, पवित्र नदियों, शब्दावली और ऐतिहासिक बदलाव की प्रमाण-सचेत कहानियाँ।

4 लेख

समाचारों में कुंभ के नाम कैसे समझें

समाचारों में कुंभ के नाम हमेशा एक-दूसरे के समान नहीं होते। “कुंभ”, “अर्ध कुंभ”, “पूर्ण कुंभ”, “महाकुंभ” या “सिंहस्थ” का ऐतिहासिक, स्थानीय या प्रशासनिक अर्थ अलग हो सकता है।

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चार नदियाँ, चार कुंभ स्थल: भूगोल का परिचय

चार प्रमुख कुंभ स्थल पवित्र नदी भूगोल से समझे जाते हैं: प्रयागराज, हरिद्वार, नासिक–त्र्यंबकेश्वर और उज्जैन। छोटा geography primer स्थान, नदी और event name मिलाने की गलती रोकता है।

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नासिक और त्र्यंबकेश्वर कुंभ के दो केंद्र क्यों हैं

नासिक–त्र्यंबकेश्वर कुंभ एक जुड़ा आयोजन है, लेकिन इसके दो अलग पवित्र और संचालन केंद्र हैं। “नासिक कुंभ” को एक छोटे venue की तरह देखने के बजाय यह संरचना समझना अधिक उपयोगी है।

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रामकुंड और कुशावर्त: दो पवित्र जल-स्थलों का संदर्भ

नासिक का रामकुंड और त्र्यंबकेश्वर का कुशावर्त दोनों कुंभ भूगोल में महत्वपूर्ण हैं, लेकिन वे एक ही घाट के दो नाम नहीं हैं।

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