अनंत काल का प्रवाह
सदियों से, गंगा उबड़-खाबड़ हिमालय से होकर बहती आई है, लेकिन हरिद्वार—जिसे 'हरि का द्वार' या भगवान विष्णु का द्वार कहा जाता है—वही स्थान है जहाँ वह अंततः मैदानों को गले लगाती है। यह परिवर्तन केवल भौगोलिक नहीं है; यह एक पहाड़ी जलधारा का माँ स्वरूप प्रदाता के रूप में आध्यात्मिक रूपांतरण है।
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