⚠️ Official Safety Advisory: Avoid unauthorized ghats during peak bathing hours. Read Safety Guidelines
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उज्जैन का विहंगम दृश्य और क्षिप्रा नदी
अवंतिका • शाश्वत नगरी

उज्जैन: महाकाल की नगरी

जहाँ स्वयं काल भी महाकाल के सम्मुख मस्तक झुकाता है, और मोक्षदायिनी क्षिप्रा अमृत के पावन प्रवाह से बहती है।

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पवित्र ज्योतिर्लिंग

काल और अनंत काल के अधिपति

उज्जैन नगरी बारह पवित्र ज्योतिर्लिंगों में से एक, श्री महाकालेश्वर मंदिर द्वारा संरेखित और सुरक्षित है। अन्य सभी ज्योतिर्लिंगों के विपरीत, महाकाल का मुख दक्षिण दिशा की ओर है—जो मृत्यु की दिशा मानी जाती है—यह काल (समय) और पुनर्जन्म के चक्र पर उनके पूर्ण आधिपत्य का प्रतीक है।

सिंहस्थ कुंभ के दौरान, महाकाल की साक्षात् दिव्य उपस्थिति इस पावन नगरी को एक आकाशीय पोर्टल में बदल देती है, जहाँ क्षिप्रा नदी में लगाई जाने वाली हर एक डुबकी अनंत परमात्मा से मिलन का माध्यम बनती है।

उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर का नक्काशीदार द्वार
।। आकाशे तारकं लिङ्गं पाताले हाटकेश्वरम् ।।

सिंहस्थ कुंभ मेला चक्र

2004

दिव्य आकाशीय संरेखण

एक ऐतिहासिक महासंगम जिसने सिंह राशि में बृहस्पति के प्रवेश (सिंहस्थ योग) के पावन साक्षी बनते हुए 3 करोड़ से अधिक तीर्थयात्रियों का स्वागत किया।

2016

आधुनिक पुनर्जागरण

2016 के सिंहस्थ महाकुंभ ने अपनी गहरी वैदिक जड़ों को अक्षुण्ण रखते हुए विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे और डिजिटल प्रबंधन के नए मानक स्थापित किए।

2028

आगामी पावन यात्रा

अगले महान आकाशीय संगम की तैयारी करें। यह सिंहस्थ मेला नई पीढ़ी के साधकों को मोक्षदायिनी शिप्रा के पावन तटों पर वापस लाने का आमंत्रण है।

राम घाट की असीम जीवंतता

उज्जैन के राम घाट पर संध्या आरती का दिव्य दृश्य
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पवित्र शाही स्नान

राम घाट सिंहस्थ महाकुंभ के मुख्य और राजसी 'शाही स्नान' का प्राथमिक केंद्र है, जहाँ विभिन्न अखाड़ों के पूज्य संत भव्य जुलूस के साथ पावन जल में उतरते हैं।

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भव्य संध्या आरती

जैसे ही शाम ढलती है, यह ऐतिहासिक घाट शंखनाद, डमरू की ध्वनि और गूंजते हुए विशाल पीतल के दीपों के साथ शिप्रा नदी की पावन सिम्फनी में बदल जाता है।

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आध्यात्मिक ऊर्जा केंद्र

ऐसा माना जाता है कि राम घाट की विशिष्ट भौगोलिक और आकाशीय स्थिति सिंहस्थ अवधि के दौरान ध्यान और ध्यानमग्न शक्तियों को कई गुना बढ़ा देती है।

खगोलीय विरासत

प्राचीन भारत का ग्रीनविच

प्राचीन काल से ही उज्जैन भारतीय खगोलशास्त्रियों के लिए मुख्य मध्याह्न रेखा (Primary Meridian) रहा है। कर्क रेखा पर स्थित होने के कारण, इस पवित्र नगरी ने समय की गणना और ग्रहों की स्थिति का निर्धारण करने के मुख्य केंद्र के रूप में कार्य किया।

आचार्य वराहमिहिर और ब्रह्मगुप्त की महान वैज्ञानिक विरासत आज भी यहाँ के जंतर-मंतर वेधशाला में जीवित है, जिसका उपयोग आज भी सिंहस्थ कुंभ के अत्यंत शुभ और सटीक मुहूर्तों को सत्यापित करने के लिए किया जाता है।

23.17° N उज्जैन का अक्षांश

साधक की यात्रा मार्गदर्शिका

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कहाँ ठहरें

  • प्रीमियम नदी तट रिसॉर्ट्स
  • पारंपरिक एवं हेरिटेज धर्मशालाएं
  • सिंहस्थ मेला टेंट सिटी कॉलोनियां
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आगमन व यातायात

यहाँ का निकटतम हवाई अड्डा इंदौर (IDR) है, जो 55 किमी दूर है। उज्जैन शहर के भीतर आवागमन के लिए ई-रिक्शा सबसे कुशल और सुलभ साधन हैं।

नक्शा देखें arrow_forward
schedule

मंदिर समय सारणी

विश्व प्रसिद्ध भस्म आरतीप्रातः 04:00 बजे
सामान्य दर्शनप्रातः 06:00 से रात्रि 09:00

*भस्म आरती में सम्मिलित होने के लिए आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से अग्रिम बुकिंग (Pre-booking) अनिवार्य है।

इंटरएक्टिव पावन मानचित्र लोड हो रहा है...